शुक्रवार, ११ मार्च, २०२२

मैं अपनी favourite हूँ

    आपण  कसे  आहोत  यापेक्षा  आपण  कसे  दिसतो  ... आपले  कपडे  कसे  आहेत  हे  सध्या  खूप  महत्त्वाचे  झाले  आहे.  मुलगा असो  किंवा  मुलगी  ... कोणीही  या  अशा  लोकांच्या  नजरेतून  सुटत  नाही. 

जन्म  झाल्यावर , आपण  सगळेच  खूप  cute, गोड  आणि  गोंडस  असतो. जसे  मोठे  होत  जातो  तसा  आपला  खरा  चेहरा  समोर  येत  जातो. मग  सावळा - सावळी, काळा  - काळी,  गोरा  - गोरी  अशी  विशेषणे  लावली  जातात.  

थोडे  आणखीन  मोठे  झाल्यावर  pimples  गालावर  खुलू  लागतात.  मग  ही  cream  वापर,  हे  lotion  लाव,  असा  face pack  छान  आहे  तुझ्यासाठी,  आणि  ही  fairness  cream  लावली  की  चेहरा  उजळेल तुझा  ... असे  सल्ले  आजूबाजूचे  आणि मित्र , मैत्रिणी  देताना  दिसतात.  आपण  काय  होतो  तर  फक्त यात  confused  होतो. 

मग  अचानक  आपल्याला  समजतं  की  आपल्याला  थोडा  डोळ्यांचा  problem  होतोय.  Blackboard  वरचं  दिसत  नाही.  वाचण्यासाठी  डोळे  बारीक  करावे  लागतात.  मग  काय  डोळे  तपासल्यावर  कळतं  की  चष्मा  लागलाय.  शाळेत  , सोसायटीत  सगळीकडे  ढापणा  - ढापणी  अशी  विशेषणे  लावायला  सुरुवात  होते.  यात  मुलगी  असेल  तर बिचारीला  टोमणे  मारून  .... तिची  इतर  मुलीशी  तुलना  करून भंडावून  सोडतात.  आता  हिचे  कसे  लग्न होणार  याची  भ्रांत  तिच्या  आई  वडिलां पेक्षा  जास्त  आजूबाजूच्या  लोकांना  पडलेली  असते. माहेर  असो  किंवा  सासर  ... तिची  तुलना  ही  होतच  असते.  माणसाचे  सुंदर  दिसणे  हे  इतके  महत्त्वाचे  आहे  का?  की लोक  त्यावरून  सुद्धा  तुम्हाला  judge  करतात. 

आम्हाला  आमची  सून  सुंदर  असावी,  सगळ्या कामात  हलणारी  असावी,  आणि  शिक्षण  ... नोकरी  हे  सुद्धा  छानच  पाहिजे.  अरे  किती  या  अपेक्षा  ....

तुला  dark  colour  शोभून  दिसत  नाही. तू  फक्त  light  colour  चे dress  घाल.  साड्या  फक्त  cream  colour  च्या  नेसत  जा.  असे  तिला  सतत  सांगितले  जाते. 

आपली  मुलगी  ही  तिच्या  आई  वडिलांसाठी  राजकुमारी  असते.  पण  ही  राजकुमारी  जेव्हा  सासरी  जाते  तेव्हा  माहेरच्या  लाडाचा  ... प्रेमाचा  crown  गळून  पडतो.  अपेक्षांचे  ओझे  आणि  जबाबदारीचे  पाऊल तिला तिच्या मनासारखे  काहीच  करू  देत  नाही.  मातृत्वाचा  भार  उचलताना  तिची  दमछाक  होत  असते.  मानसिक  आणि  शारीरिक  बदलांमुळे  ती  थोडी  स्थूल ही होते.  कारण  तिच्या  कडे  तिचेच लक्ष नसते.  एक  आई  म्हणून  परिपूर्ण  झाली  तरी  तिचे  छान  दिसणे  ही  गरजेचे  आहे  असे  तिला  सतत  सांगितले  जाते. 

बदल  हा  निसर्गाचा  नियम  आहे.  आपल्या  शरीरात  होणारे  बदल  हे नैसर्गिक  असतात, आणि  ते  अगदी  मनापासून  स्विकारावेत. पाच  बोटे  जर  सारखी  नसतात  तर  आपण  सगळे  एकसारखे  'सुंदर ' कसे  दिसणार. प्रत्येक  मुलगा  किंवा  मुलगी  ही  त्यांच्या  आई  वडिलांसाठी  special  असतात, आणि तेच  जास्त  महत्त्वाचे  आहे, नाही  का?

शरीरात  होणारे  सुंदर  बदल हे  आयुष्यात  आणि  मनात ही  सुंदर  बदल  घडवत असतात.  त्यामुळे  त्यांना  accept  करा. वरवरच्या दिसण्यावर  काही  नसते  हो  ....  pimples  येणे  ही  एक  natural  गोष्ट आहे.  वयात आलो  की  हे  सगळे  होणारच.  त्याचे  guilt  येवु  देवू  नका.  चष्मा  हा  आपल्या  डोळ्यांसाठी  एक  छान  पर्याय  आहे.  त्याने  चेहरा  वाईट  कसा  काय  दिसू  शकतो.  उंची  ही  मनाची  असावी.  संस्कार  हे  सुंदर  असावेत.  गोडवा  हा  मुखात  असावा.  प्रेम  ... माया  मनात  असावी.  पौष्टिक  खा... पोटभर  जेवा... आणि  थोडा  yoga  करा... जेणेकरून  तुमचे  मनही  शांत  राहील.  आपल्याला  आवडतील  त्या  colour चे dress  घाला.  सुंदर  साड्या  नेसा. आपण  जसे  आहोत  तसे  खूप  छान  आहोत,   त्यामुळे  स्वतःवर  प्रेम  करा. वरवरचा गोरा  रंग  हा  आपला  सुंदर पणा  फक्त  जगाला  दाखवतो. पण  तुमचा  सुंदर  स्वभाव  तुम्हाला  सुंदर  ठेवतो.  एक  माणूस  म्हणून  .... एक  व्यक्ति  म्हणुन ! 

लोकांच्या  बोलण्याकडे  दुर्लक्ष  केले  तरच  तुम्ही  स्वतः कडे  लक्ष  देऊ  शकता.  त्यांना  फक्त  वाईट  बोलता  येते. आपले  कौतुक  करायला  इथे  कोणालाही  time  नाही.  So तुम्ही  स्वतः  स्वतःला म्हणा  की  " मैं  अपनी  favourite  हूँ  "






उसंत

'मनाचा ब्रेक हा उत्तम ब्रेक' असे वाचण्यात आलेच असेल. त्यातला ब्रेक हा शब्द खूप महत्त्वाचा आहे. जसा गाडीच्या स्पीडला अधनं मधनं ब्रेकच...